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देशनोक करणी माता का इतिहास और चूहों वाली माता की कहानी - Karni Mata Mandir Ka Itihas


करणी माता का परिचय

करणी माता, जिन्हें ‘चूहों वाली माता’ या ‘डाढ़ाली डोकरी’ के नाम से भी जाना जाता है, एक हिंदू लोक देवी हैं, जिन्हें माँ दुर्गा या हिंगलाज माता का अवतार माना जाता है। उनका जन्म 20 सितंबर, 1387 ई. (विक्रम संवत 1444) को राजस्थान के जोधपुर जिले के फलोदी क्षेत्र में सुवाप गाँव में हुआ था। उनके पिता मेहाजी किनिया और माता देवल देवी चारण जाति से थे। करणी माता का बचपन का नाम रिघुबाई (रिद्धि बाई) था।

करणी माता को बीकानेर और जोधपुर के राठौड़ राजवंश की कुलदेवी माना जाता है। उन्होंने जोधपुर के मेहरानगढ़ किले और बीकानेर किले की नींव रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।


विवाह और तपस्वी जीवन
करणी माता का विवाह साठिका गाँव के चारण देपाजी बीठू से हुआ था, लेकिन सांसारिक जीवन से विरक्त होने के कारण उन्होंने वैवाहिक जीवन छोड़ दिया। उन्होंने अपने पति का विवाह अपनी छोटी बहन गुलाब बाई से करवाया और स्वयं तपस्वी जीवन अपनाकर लोगों की सेवा में लग गईं। बाद में, वे देशनोक के पास जांगलू के बीड़ में रहने लगीं, जहाँ उन्होंने अपने गोधन (गायों) की देखभाल की।


चूहों वाली माता की कहानी


करणी माता का मंदिर राजस्थान के बीकानेर से लगभग 30 किमी दूर देशनोक में स्थित है, जिसे ‘चूहों का मंदिर’ कहा जाता है। इस मंदिर में 20,000 से 30,000 चूहे रहते हैं, जिन्हें ‘काबा’ कहा जाता है। ये चूहे माता के भक्तों या उनके वंशजों के रूप में पूजे जाते हैं। मंदिर की सबसे प्रसिद्ध कथा उनके सौतेले पुत्र लक्ष्मण से जुड़ी है।


लक्ष्मण की कथा
लोककथा के अनुसार, करणी माता के सौतेले पुत्र लक्ष्मण (उनकी बहन गुलाब बाई का पुत्र) कोलायत के कपिल सरोवर में पानी पीने की कोशिश में डूब गए। करणी माता ने मृत्यु के देवता यमराज से उन्हें पुनर्जनन देने की प्रार्थना की। यमराज ने पहले मना किया, लेकिन माता की भक्ति से प्रभावित होकर उन्होंने लक्ष्मण को चूहे के रूप में पुनर्जनन दिया। एक अन्य कथा के अनुसार, करणी माता ने अपने वंशजों को मृत्यु के बाद चूहों के रूप में पुनर्जनन का वरदान दिया, ताकि वे उनके मंदिर में उनकी सेवा करें।


चूहों की सेना की कथा
बीकानेर के लोकगीतों में एक अन्य कहानी प्रचलित है, जिसमें बताया जाता है कि 20,000 सैनिकों की एक सेना ने देशनोक पर आक्रमण करने की कोशिश की। करणी माता ने अपने चमत्कारिक शक्तियों से इन सैनिकों को चूहों में बदल दिया और उन्हें अपनी सेवा में रख लिया।


मंदिर की विशेषताएँ

  • चूहों की पूजा: मंदिर में रहने वाले चूहों को पवित्र माना जाता है। इन्हें भोजन के रूप में दूध, मिठाई, और बाजरा दिया जाता है। भक्त इन चूहों का जूठा प्रसाद ग्रहण करते हैं, और आश्चर्यजनक रूप से इससे कोई बीमारी नहीं फैलती।
  • सफेद चूहे: मंदिर में कुछ सफेद चूहे भी हैं, जिन्हें करणी माता और उनके पुत्रों का अवतार माना जाता है। इनके दर्शन को अत्यंत शुभ माना जाता है।
  • मंदिर की वास्तुकला: मंदिर का निर्माण 15वीं-20वीं सदी में हुआ, जिसमें मुगल और राजपूत शैली का मिश्रण दिखता है। मंदिर के मुख्य द्वार पर संगमरमर की नक्काशी और चांदी के किवाड़ हैं। बीकानेर के महाराजा गंगा सिंह ने इसका जीर्णोद्धार करवाया।
  • चमत्कार: मंदिर में हजारों चूहों के बावजूद कोई बदबू या बीमारी नहीं फैलती। माना जाता है कि ये चूहे कभी मंदिर के बाहर नहीं जाते।


मंदिर का महत्व

  • करणी माता मंदिर न केवल चारण और राठौड़ समुदाय के लिए, बल्कि सभी जातियों और समुदायों के लिए आस्था का केंद्र है।
  • यहाँ नवरात्रि में मेला लगता है, जिसमें देशभर से श्रद्धालु आते हैं।
  • माना जाता है कि मंदिर में दर्शन करने से शनि और राहु का दोष समाप्त होता है।
  • मंदिर में सुबह 5 बजे मंगला आरती और शाम 7 बजे संध्या आरती के समय चूहों का बाहर निकलना देखने योग्य होता है।


चमत्कार और मान्यताएँ

  • करणी माता के जीवन से जुड़े कई चमत्कार प्रचलित हैं, जैसे उनकी भुआ की टेढ़ी उंगली को ठीक करना, गायों के लिए पानी का चमत्कार, और सेना को भोजन कराना।
  • माना जाता है कि यदि किसी भक्त के सिर पर चूहा चढ़ जाए, तो यह शुभ संकेत है।
  • यदि गलती से कोई चूहा मर जाए, तो प्रायश्चित के लिए सोने या चांदी का चूहा चढ़ाना पड़ता है।


हाप्रयाण

विक्रम संवत 1595 (1538 ई.) में चैत्र शुक्ल नवमी को करणी माता ने घिनेरू तलाई (जैसलमेर) में ज्योतिर्लीन होकर भौतिक शरीर त्याग दिया। उनकी इच्छानुसार देशनोक में उनकी मूर्ति स्थापित की गई, जो आज भी मंदिर में विराजमान है।


निष्कर्ष
देशनोक का करणी माता मंदिर विश्व का एकमात्र मंदिर है, जहाँ चूहों को देवता के रूप में पूजा जाता है। यह मंदिर न केवल धार्मिक, बल्कि सांस्कृतिक और ऐतिहासिक दृष्टि से भी महत्वपूर्ण है। करणी माता की कहानियाँ और उनके चमत्कार आज भी लोगों में आस्था और श्रद्धा जगाते हैं।


यदि आपको और विस्तृत जानकारी चाहिए या किसी विशेष पहलू पर ध्यान देना हो, तो कृपया बताएँ!

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