आजकल तलाक क्यों बढ़ रहे हैं? जानिए प्रमुख कारण - Why are divorces increasing these days? Know the main reasons
आजकल तलाक (डाइवोस) के मामलों में वृद्धि के कई सामाजिक, आर्थिक, और व्यक्तिगत कारण हैं। निम्नलिखित कुछ प्रमुख कारण हैं जो इस प्रवृत्ति को प्रभावित करते हैं, साथ ही हाल के समय में तलाक बढ़ने की वजहें भी शामिल हैं:
तलाक के प्रमुख कारण
संचार की कमी (Lack of Communication):- दंपति के बीच खुलकर बातचीत न होना एक प्रमुख कारण है। गलतफहमियां, अनसुलझे मुद्दे, और भावनात्मक दूरी रिश्ते में दरार पैदा करती हैं।
- आधुनिक जीवनशैली में व्यस्तता और समय की कमी के कारण जोड़े एक-दूसरे से भावनात्मक रूप से कट जाते हैं।
- आर्थिक तंगी, नौकरी की अनिश्चितता, या वित्तीय असमानता तनाव का कारण बनती है। पैसों को लेकर असहमति और जिम्मेदारियों का असंतुलन रिश्ते को कमजोर करता है।
- हाल के वर्षों में, महंगाई और नौकरी की अस्थिरता ने इस तनाव को और बढ़ाया है।
- आधुनिक समाज में, विशेषकर शहरी क्षेत्रों में, लोग विवाह से व्यक्तिगत खुशी और बराबरी की उम्मीद रखते हैं। अगर ये अपेक्षाएं पूरी न हों, तो लोग तलाक का रास्ता चुनते हैं।
- महिलाओं की बढ़ती स्वतंत्रता और जागरूकता ने भी तलाक की दर को प्रभावित किया है, क्योंकि अब वे असंतोषजनक रिश्तों को सहने के बजाय अलग होने का फैसला लेती हैं।
- विश्वासघात, चाहे वह भावनात्मक हो या शारीरिक, तलाक का एक बड़ा कारण है। डिजिटल युग में सोशल मीडिया और डेटिंग ऐप्स ने बेवफाई के अवसरों को बढ़ाया है।
- भारत जैसे देशों में, जहां पहले तलाक को सामाजिक रूप से स्वीकार नहीं किया जाता था, अब लोग इसे कम कलंक के रूप में देखते हैं। शिक्षा, शहरीकरण, और पश्चिमी प्रभाव ने तलाक को सामान्य बनाया है।
- व्यक्तिगत स्वतंत्रता और आत्म-सम्मान को प्राथमिकता देने की प्रवृत्ति बढ़ी है।
- शारीरिक, भावनात्मक, या मानसिक दुरुपयोग तलाक का एक गंभीर कारण है। जागरूकता बढ़ने और कानूनी सहायता (जैसे भारत में घरेलू हिंसा अधिनियम, 2005) की उपलब्धता ने महिलाओं को ऐसे रिश्तों से बाहर निकलने के लिए प्रोत्साहित किया है।
- वैचारिक मतभेद, जीवनशैली में अंतर, या व्यक्तिगत लक्ष्यों का टकराव तलाक का कारण बनता है। प्रेम विवाह और अरेंज्ड मैरिज दोनों में यह देखा जाता है।
- कई बार, जल्दबाजी में लिए गए विवाह के फैसले भी बाद में असंगति का कारण बनते हैं।
- भारत में, ससुराल या परिवार का अत्यधिक हस्तक्षेप रिश्तों में तनाव पैदा करता है। खासकर अरेंज्ड मैरिज में यह एक बड़ा मुद्दा हो सकता है।
- तनाव, अवसाद, या अन्य मानसिक स्वास्थ्य समस्याएं रिश्तों पर नकारात्मक प्रभाव डालती हैं। अगर एक या दोनों पार्टनर मानसिक स्वास्थ्य के लिए सहायता नहीं लेते, तो यह रिश्ते को तोड़ सकता है।
- तलाक की कानूनी प्रक्रिया अब पहले की तुलना में आसान हो गई है। भारत में हिंदू विवाह अधिनियम (1955) और विशेष विवाह अधिनियम (1954) के तहत आपसी सहमति से तलाक लेना सरल हो गया है।
- सामाजिक स्वीकृति बढ़ने से लोग तलाक लेने में कम हिचकते हैं।
हाल के समय में तलाक बढ़ने की वजहें
महिलाओं की स्वतंत्रता:- शिक्षा और रोजगार के अवसरों के कारण महिलाएं आर्थिक रूप से स्वतंत्र हो रही हैं। वे अब अपमानजनक या दुखी रिश्तों को सहने के लिए मजबूर नहीं हैं।
- 2020 के बाद, भारत में तलाक के मामलों में 15-20% की वृद्धि देखी गई है, खासकर शहरी क्षेत्रों में।
- सोशल मीडिया और इंटरनेट ने रिश्तों में तनाव बढ़ाया है। ऑनलाइन रिश्तों, तुलनात्मक जीवनशैली, और डिजिटल बेवफाई के मामले बढ़े हैं।
- लॉकडाउन और वर्क-फ्रॉम-होम ने दंपतियों को एक-दूसरे के साथ ज्यादा समय बिताने के लिए मजबूर किया, जिससे कई रिश्तों में छिपे तनाव सामने आए।
- कोविड-19 महामारी (2020-2022) के दौरान, कई जोड़ों ने आर्थिक तनाव, नौकरी छूटने, और घरेलू जिम्मेदारियों के असंतुलन के कारण तलाक का फैसला लिया।
- भारत में कोर्ट के आंकड़ों के अनुसार, 2020-2021 में तलाक के मामलों में उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की गई।
- तेज-रफ्तार जीवन, करियर की प्राथमिकता, और व्यक्तिगत महत्वाकांक्षाएं रिश्तों पर दबाव डालती हैं। कई बार, जोड़े एक-दूसरे को समय नहीं दे पाते।
- शहरीकरण ने पारंपरिक संयुक्त परिवार की संरचना को कमजोर किया है, जिसके कारण जोड़ों को परिवार का भावनात्मक समर्थन कम मिलता है।
तलाक की दर में वृद्धि के आंकड़े
- भारत में तलाक की दर: हालांकि भारत में तलाक की दर पश्चिमी देशों (जैसे अमेरिका, जहां 40-50% विवाह तलाक में समाप्त होते हैं) की तुलना में कम है, फिर भी यह बढ़ रही है। शहरी क्षेत्रों में तलाक की दर लगभग 1-2% है, जबकि ग्रामीण क्षेत्रों में यह 0.5% से कम है।
- हाल के रुझान: एक अध्ययन के अनुसार, 2010 से 2020 के बीच भारत में तलाक के मामलों में लगभग 50% की वृद्धि हुई है, खासकर मेट्रो शहरों जैसे दिल्ली, मुंबई, और बेंगलुरु में।
तलाक को कम करने के उपाय
- संचार में सुधार: नियमित और खुला संवाद रिश्ते को मजबूत करता है।
- काउंसलिंग: वैवाहिक काउंसलिंग या थेरेपी से कई मुद्दों को सुलझाया जा सकता है।
- आर्थिक प्रबंधन: वित्तीय योजना और पारदर्शिता तनाव को कम करती है।
- सामाजिक समर्थन: परिवार और दोस्तों का सहयोग रिश्ते को बचाने में मदद करता है।
- कानूनी जागरूकता: तलाक से पहले मध्यस्थता और समझौते के विकल्पों पर विचार करें।
निष्कर्ष
आजकल तलाक की बढ़ती दर सामाजिक, आर्थिक, और व्यक्तिगत बदलावों का परिणाम है। हालांकि यह एक नकारात्मक प्रवृत्ति लग सकती है, यह महिलाओं की स्वतंत्रता और व्यक्तिगत खुशी को प्राथमिकता देने का भी संकेत है। तलाक से बचने के लिए, जोड़ों को एक-दूसरे के प्रति समझ, सम्मान, और संचार पर ध्यान देना चाहिए। यदि रिश्ता बचाना संभव न हो, तो तलाक को एक नई शुरुआत के रूप में देखा जा सकता है, बशर्ते यह आपसी सहमति और सम्मान के साथ हो।
नोट: यदि आप किसी विशिष्ट स्थिति या आंकड़े के बारे में और जानकारी चाहते हैं, तो कृपया बताएं
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